भारत में अंगुली चिन्ह


सारांश

विश्व का पहला अंगुलि चिह्न ब्यूरो वर्ष 1897 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में स्थपित किया गया था। तब से अंगुलि चिह्न विज्ञान के क्षेत्र में भारी प्रगति हो गई है स्वदेशी स्वचलित अंगुलि चिह्न पहचान प्रणाली का आविष्कार हो चुका हो, केन्द्रीय अंगुलि चिह्न ब्यूरो और राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो द्वारा अत्याधुनिक लाइव स्कैनिंग सिस्टम प्राप्त किया जा चुका हैइस समय राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में 29 अंगुलि चिह्न ब्यूरो हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एन सी आर बी) का केन्द्रीय अंगुलि चिह्न ब्यूरो भारतीय दंड संहिता (आई पी सी) और अन्य विभिन्न आधिनियमों के तहत सिद्धदोष/गिरफ्तार अंतर्राज्य एवं अंतरराष्ट्रीय अपरधियों के अंगुलि चिह्न रिकार्ड का रखरखाव करता है"भारत में अंगुलि चिह्न-2014" में राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो की व‎र्ष 2014 के दौरान की स्थिति का वर्णन किया गया है। यह वर्णन उनके कार्यकलापों, कर्मचरियों की संख्या और स्वचालन (ऑटोमेशन) के संबंध में एक ही फार्मेट में किया गया है। भारत के केन्द्रीय अंगुलि चिह्न ब्यूरो और अन्य राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो के इतिहास कार्यों था पिछले तीन वर्ष (2012-2014) के उनके प्रक्रियागत कार्यों का विवरण पहले दो अध्यायों में किया गया है।इस वर्ष हमने इसमें केन्द्रीय अंगुलि चिह्न ब्यूरो की उपलब्धियों का विवरण और उसके कर्मियों द्वारा प्रकशित शोध पत्रों की सूची भी सम्मिलित की है यह सब अध्याय में दिया गया है। विषय तलिका को भी आधिक बोधगम्य व यथार्तपूर्ण बनाया गया हो। केन्द्रीय अंगुलि चिह्न ब्यूरो और राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो की 31/12/2014 की स्थिति के अनुसार, कर्मचरियों की मंजूर एवं वास्तविक संख्या का विवरण अध्याय तीन में दिया गया हो।

समूचे देश के वर्ष 2014 के दौरान के ऐसे महत्वपूर्ण मामलों का उल्लेख अध्याय IV में किया गया हो जिनमें अपराध घटनास्थल (एस ओ सी) पर पाए गए अुंगलि चिह्नों ने अपरधियों की पहचान करने में और मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।जिन महत्वपूर्ण अंगुलि चिह्न (एफ पी) दस्तावेज मामलों की जांच की गई और अज्ञात शवों (यू डी बी) की पहचान की गई उनका ब्योरा भी अध्याय IV में दिया गया है।

अध्याय 5 व 6 विभिन्न राज्यों के अंगुलि चिह्न ब्यूरो में अंगुलि चिह्नों के कंप्यूटरीकरण व आधुनिक उपस्करों से संबंधित हैं और साथ ही उनकी तत्संबंधी स्थिति भी दर्शाई गई हैस्वाचालन की आवश्यकता और स्वदेशी स्वाचलित अंगुलि चिह्न पहचान प्रणाली के विकास के मुद्दे पर भी चर्चा की गई हैइनमें ये विषय भी शमिल किए गए हैं:- अर्ध-स्वाचलित प्रणाली जो कि स्वाचलित अंगुलि चिह्न पहचान प्रणाली (ए एफ आई एस) का प्रारंभिक चरण है ; फिंगर प्रिंट अनैलसिस एंड क्रिमिनल ट्रेसिंग सिस्टम (एफ ए सी टी एम) जो ए एफ आई एस का भारतीय स्वरूप हो; उसका विषय क्षेत्र, कार्य विभिन्न वर्शन और मैनुअल सिस्टम की तुलना के उसके लाभ ।इस प्रकाशन के अंतिम अध्याय में वर्ष में राज्य अंगुलि चिह्न ब्यूरो द्वारा दस अंकीय अंगुलि चिह्न रिकार्ड व सर्च स्लिपस, अपराध घटना स्थल व दस्तावेज मामलों के संबंध में किए गए कार्यों का तुलनात्मक विवरण दिया गया हो।