भारत में अंगुली चिन्ह


सारांश

विश्व का पहला अंगुलि छाप ब्यूरो वर्ष 1897 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में स्थापित किया गया था। तब से स्वदेशी स्वचलित अंगुलि छाप पहचान के आगमन से और केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो तथा राज्य अंगुलि छाप ब्यूरों द्वारा अत्याधुनिक लाइव स्कैनिगं सिस्टम की उपलब्धता से अंगुलि छाप विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधिक प्रगति हुई हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एन.सीआर.बी) का केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो (सी.एफ.पी.बी) भारतीय दण्ड संहिता (आई.पी.सी) और अन्य विभिन्न लागू अधिनियमों के तहत सिद्धदोष/गिरफतार अंतर्राज्य और अंतराष्ट्रीय अपराधियों के अंगुलि छाप रिकार्ड का रखरखाव करता है।

"भारत में अंगुलि छाप-2015" वर्ष 2015 के दौरान राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो की स्थिति को एक सामान्य फार्मट में उनकें संपदिन कार्यकलापों, कर्मचरियों की संख्या और स्वचालन के स्तर के संबंध में प्रस्तुत करता है। भारत के केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो और अन्य राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो के पिछले तीन वर्ष (2013-2015) के इतिहास कार्यों और उनके प्रक्रियागत कार्यों का वर्णन पहले दो अध्यायों में किया गया है। इस वर्ष भी हमने अध्याय 1 में केन्द्रीय अंगुलि छाप कार्मिकों की उपलब्धियों को शामिल किया है। विषय-सूची को भी और अधिक बोधगम्य और स्पष्ट बनाया गया है। अध्याय–II राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो के कार्य संपादन सार को प्रस्तुत करता है। अध्याय –III में 31-12-2015 को केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो और राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो की संस्वीकृत एवं वास्तविक स्टॉफ की संख्या दर्शाई गई है।

वर्ष 2015 के दौरान संपूर्ण देश में पाए गए ऐसे महत्वपूर्ण मामलों का उल्लेख अध्याय –IV में किया गया है जहां अपराध स्थल (एस.ओ.सी) पर पाए गए अंगुलि चिह्नों ने अपराधियों की पहचान करने में और मामलों को सुलझानें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिन महत्वपूर्ण अंगुलि छाप (एफ.पी) दस्तावेज मामलों की जांच की गई और अज्ञात शवों (यू.डी.बी) की पहचान की गई, उनका ब्योरा भी अध्याय –IV में दिया गया है।

अध्याय V व VI विभिन्न राज्यों के अंगुलि चिह्न ब्यूरो में अंगुलि चिह्नों के कंप्यूटरीकरण व आधुनिक उपस्करों से संबंधित हैं और साथ ही उनकी तत्संबंधी स्थिति भी दर्शाई गई स्वाचालन की आवश्यकता और स्वदेशी स्वाचलित अंगुलि छाप पहचान प्रणाली के विकास के मुद्दे पर भी चर्चा की गई है | इनमें ये विषय भी शमिल किए गए हैं:- अर्ध-स्वाचलित प्रणाली जो कि स्वाचलित अंगुलि चिह्न पहचान प्रणाली (ए एफ आई एस) का प्रारंभिक चरण हैं, फिंगर प्रिंट अनैलसिस एंड क्रिमिनल ट्रेसिंग सिस्टम (एफ ए सी टी एस) जो ए एफ आई एस का भारतीय स्वरूप हों, उसका विषय क्षेत्र, कार्य विभिन्न वर्शन और मैनुअल सिस्टम की तुलना के उसके लाभ। इस प्रकाशन के अंतिम अध्याय में वर्ष में राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो द्वारा दस अंकीय अंगुलि छाप रिकार्ड व सर्च स्लिपस, अपराध घटना स्थल व दस्तावेज मामलों के संबंध में किए गए कार्यों का तुलनात्मक विवरण दिया गया हो।